रविवार, 29 सितंबर 2013

भारतीय गांधी अध्ययन समिति के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन



     मानवता को बचाने का रास्‍ता गांधी विचारों में ही  –कुलपति विभूति नारायण राय

  
महात्‍मा गांधी के विचार-चिंतन से ही हमें मानवता को बचाने का रास्‍ता मिल सकता है। अनेक प्रकार की समस्‍याएं दूर करने और विनाश से बचने के लिए हमें गांधी के पास जाना चाहिए। विकास के नये रास्‍ते तलाशने के लिए यह तीन दिवसीय चिंतन काम आएगा। उक्‍त आशय के विचार कुलपति विभूति नारायण राय ने रखे। वे महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में 27 सितंबर से चल रहे भारतीय गांधी अध्ययन समिति के 36 वें तीन दिवसीय वार्षिक राष्‍ट्रीय अधिवेशन के समापान समारोह में कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए बोल रहे थे। रविवार दि. 29 को सम्‍पन्‍न हुए समापन समारोह में भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति के अध्‍यक्ष डॉ. शिवराज नाकाडे, वर्धा स्थित गांधी विचार परिषद के निदेशक भरत महोदय, मगन संग्रहालय की अध्‍यक्ष विभा गुप्‍ता, समिति के महासचिव डॉ. अनिल कुमार झा तथा अधिवेशन के स्‍थानीय सचिव डॉ. नृपेंद्र प्रसाद मोदी मंचासीन थे।
कुलपति राय ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए अधिवेशन विश्‍वविद्यालय में आयोजित करने के लिए भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति के प्रति धन्‍यवाद व्‍यक्‍त किया।
समारोह में विभा गुप्‍ता ने मगन संग्रहालय का परिचय देते हुए कहा कि हमें छोटी-छोटी कलाएं और भाषाओं की अभिव्‍यक्ति को बचाना चाहिए। भरत महोदय ने माना कि नयी पीढी ऊर्जावान है। इस पीढी को शिक्षा के द्वारा जीवन का अर्थ बताया जाए ताकि वे नये रास्‍ते का चुनाव कर सके। डॉ. शिवराज नाकाडे ने आग्रह किया कि समिति में अधिक से अधिक संख्‍या में युवकों को शामिल करना चाहिए। स्‍थानीय सचिव डॉ. नृपेन्‍द्र प्रसाद मोदी ने सभी के प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि कुलपति राय के मार्गनिर्देशन में और सभी समितियों के सदस्‍यों की कड़ी मेहनत से यह अधिवेशन सफलता की उंचाई को प्राप्‍त कर सका।   
इस अवसर पर उत्‍कृष्‍ट आलेख के लिए सोहनराज लक्ष्‍मीदेवी तातेड़ पुरस्‍कार का वितरण किया गया जिसका प्रथम पुरस्‍कार विश्‍वविद्यालय की शोधार्थी अर्चना शर्मा को कुलपति विभूति नारायण के द्वारा दिया गया। द्वितीय पुरस्‍कार बिहार से आए प्रतिभागी राजीव रंजन को तथा तृतीय पुरस्‍कार राजस्‍थान से आयी सीमा कुंजारा को मिला। पुरस्‍कार चयन समिति में साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. सूरज पालीवाल, भाषा विद्यापीठ के असोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार पाण्‍डेय तथा महात्‍मा गांधी फ्युजी गुरूजी शांति अध्‍ययन केंद्र के निदेशक प्रो. मनोज कुमार ने बतौर निर्णायक भूमिका निभायी। समारोह का संचालन साहित्‍य विद्यापीठ की रीडर डॉ. प्रीति सागर ने किया तथा तथा धन्‍यवाद ज्ञापन भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति के महासचिव डॉ. अनिल कुमार झा ने प्रस्‍तुत किया। प्रारंभ में भारती देवी और अमृत अर्णव ने सत्र की रिपोर्ट प्रस्‍तुति की।  

27-29 सितंबर को आयोजित अधिवेशन का मुख्‍य विषय ‘‘प्राकृतिक संसाधनों की राजनीति और स्‍वामित्‍व का प्रश्‍न : गांधीवादी हस्‍तक्षेप’’ रखा गया था। इसके अलावा विभिन्‍न उपविषयों पर 9 सत्रों में विचार-विमर्श किया गया। अधिवेशन का एक दिन सेवाग्राम आश्रम में रखा गया था। इस अधिवेशन में देशभर से विद्वान, कार्यकर्ता और शोधार्थियों ने हिस्‍सा लिया था।
इस दौरान साहित्‍यकार से. रा. यात्री, श्रीमती पद्मा राय, साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. सूरज पालीवाल, प्रो. मनोज कुमार, डॉ. डी. एन. प्रसाद, डॉ. एम. एस. दादागे, डॉ. सुधीर जेना, सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी, डॉ. रामानुज अस्‍थाना, डॉ. बीर पाल सिंह यादव, राकेश मिश्र, चित्रा माली, विशेष कर्तव्‍य अधिकारी नरेंद्र सिंह, बी. एस. मिरगे, राजीव पाठक, तुषार वानखेडे, अमित विश्‍वास आदि समेत प्रतिभागी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं प्रमुखता से उपस्थित थे।


प्राकृतिक संसाधनों पर समाज का हक हो राज्‍य का नहीं - रामजी सिंह

भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति के 36 वें वार्षिक राष्‍ट्रीय अधिवेशन का उदघाटन


आज पूंजीवाद और समाजवाद दिवालिया हो चुका है। पूंजीवादी दिनोंदिन प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों का स्‍वामित्‍व राज्‍य कर रहा है और वह अपने राजनैतिक स्‍वार्थ के लिए आम जनता की जमीन अधिग्रहित कर लेता है जिससे किसान और आदिवासी भूमिहीन हो रहे है। प्राकृतिक संसाधनों पर स्‍वामित्‍व समाज का हो, राज्‍य का नहीं अन्‍यथा राज्‍य जनता से राक्षसी व्‍यवहार करने लगेला। उक्‍त उदबोधन रामजी सिंह ने जोशीले अंदाज में दिये। वे महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति के 36 वें तीन दिवसीय वार्षिक राष्‍ट्रीय अधिवेशन के उदघाटन के अवसर पर शुक्रवार को समारोह की अध्‍यक्षता कर रहे थे। इस अधिवेशन का उदघाटन विश्‍वविद्यालय के अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ भवन के प्रांगण में ‘हिंद स्‍वराज भवन’ में न्‍यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी द्वारा किया गया। उदघाटन समारोह में विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय, गांधी अध्‍ययन समिति के अध्‍यक्ष डॉ. शिवराज नाकाडे, गुजरात विश्‍वविद्यालय, अहमदाबाद के कुलपति सुदर्शन आयंगार, अधिवेशन के स्‍थानीय सचिव तथा अहिंसा एवं शांति अध्‍ययन विभाग के विभागाध्‍यक्ष डॉ. नृपेंद्र प्रसाद मोदी, सहायक प्रोफेसर राकेश मिश्र मंचासीन थे। इस अधिवेशन का मुख्‍य विषय ‘‘प्राकृतिक संसाधनों की राजनीति और स्‍वामित्‍व का प्रश्‍न : गांधीवादी हस्‍तक्षेप’’ रखा गया है।
     
उदघाटन वक्‍तव्‍य में न्‍यायमूर्ति धर्माधिकारी ने कहा कि आज पर्यावरण, गरीबी, विस्‍थापन जैसी समस्‍याएं हल करने के लिए पुराने शस्‍त्र नहीं चलेंगे, इन समस्‍याओं को हल करने के लिए हमें नये शस्‍त्र इजात करने पडेंगे। उन्‍होंने कहा कि महात्‍मा गांधी ने पर्यावरण संरक्षण नहीं बल्कि पर्यावरण सेवा का संदेश दिया था। गांधी जी के बताये रास्‍ते पर चलने के लिए हमें चाहिए की जल, जंगल और जमीन को बचाएं रखकर पर्यावरण की सेवा करें। भारत एक ऐसा देश है जहां नदी को मां, हिमालय को बाप माना जाता है और जहां वृक्ष की पूजा की जाती है। ऐसे देश में हम पर्यावरण के प्रति कितने जागरूक है इसपर सोचने का वक्‍त आ गया है। हम प्रकृति के संरक्षण की बात करते है परंतु गांधीजी ने निसर्ग की सेवा की बात कहीं थी। हमें हमारे समय की पीढ़ी के लिए नहीं, आनेवाली पीढ़ी के लिए जरूर सोचना होगा। गांधीजी ने जिओ और जीने दो के सिद्धांत पर हमें अहिंसा का मंत्र दिया था। लेकिन वर्तमान में हम इस मंत्र को लोग जीवन में आत्‍मसात नहीं कर रहे हैं।
उदघाटन समारोह में स्‍वागत वक्‍तव्‍य में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि 80 वर्ष पहले गांधीजी के चरण वर्धा की भूमि पर पड़े थे। उन्‍होंने यहां 14 वर्ष रहकर अपने विचार-दर्शन के लिए एक उपयुक्‍त स्‍थान माना था। गांधी जी ने यहां अपने सपनों के कई कार्यक्रम शुरू किये थे, यह विश्‍वविद्यालय भी उनके सपनों के एक कार्यक्रम के तहत स्‍थापित हुआ है। कुलपति राय ने देशभर से आएं प्रतिभागियों का स्‍वागत करते हुए विश्‍वविद्यालय में चल रहे विभिन्‍न विकासात्‍मक कार्यक्रम एवं उपक्रमों की जानकारी अपने स्‍वागत वक्‍तव्‍य में दी। भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति के अध्‍यक्ष डॉ. शिवराज नाकाडे ने अपने वक्‍तव्‍य में कहां कि सतत विकास के लिए पर्यावरण एक अहम मुद्दा है। जमीन, प्राकृतिक व्‍यवस्‍था, जीव और जंतू, कोयला, लोहा और तेल तथा समुद्र यह हमारे प्राकृतिक संसाधन है। इन संसाधनों की समाज को जरूरत है। भावी पीढ़ी के लिए पर्यावरण को बचाना हमारे सामने वर्तमान चुनौती है। उन्‍होंने गांधीजी के आर्थिक विकास के सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहां कि स्‍वदेशी तत्‍व ही आर्थिक विकास के केंद्र के रूप में गांधीजी के दर्शन से दिखता है। गांधी जी ने ग्रामीण औद्योगिकरण और स्‍थानीय श्रमिकों के योगदान को ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत बनाने के लिए आधार माना था।  डॉ. नाकाडे ने वसुधैव कुटुंबकम का सिद्धांत गांधी दर्शन से अमल में लाने की बात करते हुए सत्‍य, अहिंसा, शांति, सहअस्तित्‍व, विकेंद्रीकरण आदि विषयों की चर्चा अपने उदबोधन में की। इस असवर पर डॉ. नाकाडे ने एल.एन. मिथिला विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर एस. एन. झा का संदेश पढ़कर सुनाया। प्रो. सुदर्शन आयंगार ने बीज वक्‍तव्‍य दिया। अपने वक्‍तव्‍य में उन्‍होंने प्राकृतिक संसाधनों की राजनीति और स्‍वामित्‍व का प्रश्‍न इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर किसका अधिकार होना चाहिए इसपर चर्चा होनी चाहिए क्‍योंकि आज जल, जंगल और जमीन की राजनीति गरमायी हुई है। 1980 में विश्‍व की आबादी एक अरब थी, आज सात अरब के ऊपर जा रही है। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक संसाधनों पर मानव बढ़ना जाहीर सी बात है। समिति के महासिचव अनिल कुमार झा ने भी समयोचित वक्‍तव्‍य दिया। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रजव्‍लन से किया गया। विश्‍वविद्यालय के छात्रों ने विश्‍वविद्यालय का कुलगीत प्रस्‍तुत किया। समारोह का संचालन राकेश मिश्र ने किया तथा धन्‍यवाद ज्ञापन अधिवेशन के स्‍थानीय सचिव डॉ. नृपेंद्र प्रसाद मोदी ने प्रस्‍तुत किया। समारोह में देशभर से आये 200 से अधिक विद्वान तथा सामाजिक कार्यकर्ता, विश्‍वविद्यालय के छात्र-छात्राएं तथा वर्धा के गणमान्‍य नागरिक बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।
 
लोकनायक जयप्रकाश नारायण भवन का उदघाटन और गांधी प्रतिमा पर माल्‍यार्पण  
उदघाटन समारोह से पूर्व मुख्‍य अतिथि रामजी सिंह, सुदर्शन आयंगार, कुलपति विभूति नारायण राय, नृपेंद्र प्रसाद मोदी, प्रो. मनोज कुमार आदि ने गांधी हिल्‍स पर बनी गांधी प्रतिमा पर पुष्‍पांजलि अर्पित कर अभिवादन किया तथा परिसर में वृक्षारोपण किया। इसके पश्‍चात संस्‍कृति विद्यापीठ भवन का नामकरण लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर किया गया। भवन के सामने जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा का अनावरण न्‍यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी, रामजी सिंह, सुदर्शन आयंगार, कुलपति विभूति नारायण राय, नृपेंद्र प्रसाद मोदी, प्रो. मनोज कुमार की उपस्थिति में किया गया।
तीन दिवसीय अधिवेशन में प्राकृतिक संसाधन : मुद्दे और चुनौतियां, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण’, जल, जंगल और जमीन का संरक्षण’, संसाधन और संघर्ष : बाहर निकलने के गांधीवादी रास्‍ते’, संपत्ति पर नियंत्रण का सवाल : हिंसक बनाम अहिंसक संघर्ष’, सभ्‍यता का संकट और उसका समाधान’, राष्‍ट्र राज्‍य की केंद्रीयता और स्‍वराज का विकेंद्रीकरण’, विकास और न्‍यासिता : वैचारिक विश्‍लेषण तथा सुशासन और धारणीय विकास इन विषयों चर्चा होगी। इस अधिवेशन का एक सत्र 28 सितंबर को गांधी विचार की प्रेरणास्‍थली सेवाग्राम स्थित शांति भवन, बुनियादी तालीम के परिसर में सम्‍पन्‍न होगा।

गुरुवार, 26 सितंबर 2013

भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति का 36 वां वार्षिक राष्‍ट्रीय अधिवेशन वर्धा में आज से



विधायक प्रा. सुरेशभाऊ देशमुख होंगे उदघाटन समारोह के अध्‍यक्ष, गांधी चिंतन पर होगी चर्चा   

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा में भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति का 36 वां तीन दिवसीय वार्षिक राष्‍ट्रीय अधिवेशन शुक्रवार दि. 27 से शुरू होगा जिसका उदघाटन विश्‍वविद्यालय के अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ भवन के प्रांगण में ‘हिंद स्‍वराज भवन’ में सुबह 10.00 बजे होगा।
29 सितंबर तक चलनेवाले अधिवेशन के उदघाटन समारोह की अध्‍यक्षता वर्धा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक प्रा. सुरेशभाऊ देशमुख करेंगे। उदघाटन समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में न्‍यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी उपस्थित रहेंगे। समारोह के मुख्‍य वक्‍ता होंगे लोकसभा के पूर्व सांसद तथा गांधी चिंतक रामजी सिंह, गुजरात विश्‍वविद्यालय, अहमदाबाद के कुलपति सुदर्शन आयंगार और सिंहानिया विश्‍वविद्यालय, राजस्‍थान के पूर्व कुलपति सोहनराज तातेड़। विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय उदघाटन समारोह में स्‍वागत वक्‍तव्‍य देंगे। समारोह का प्रास्‍ताविक भारतीय गांधी अध्‍ययन समिति के अध्‍यक्ष एवं डॉ. बाबासाहब आंबेडकर मराठवाडा विश्‍वविद्यालय, औरंगाबाद के पूर्व कुलपति डॉ. शिवराज नाकाडे करेंगे। समारोह का संचालन सहायक प्रोफेसर राकेश मिश्रा करेंगे तथा विश्‍वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति अध्‍ययन विभाग के अध्‍यक्ष व अधिवेशन के स्‍थानीय सचिव डॉ. नृपेंद्र प्रसाद मोदी धन्‍यवाद ज्ञापन प्रस्‍तुत करेंगे। अधिवेशन में देश भर के गांधी विचारक, चिंतक, कार्यकर्ता एवं छात्रों समेत 200 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित रहेंगे। उदघाटन के पहले पूवाह्न 9.30 बजे मुख्‍य अतिथि द्वारा गांधी हिल्‍स पर बनी गांधी प्रतिमा पर पुष्‍पांजलि अर्पित की जाएगी और परिसर में वृक्षारोपण किया जाएगा। बाद में संस्‍कृति विद्यापीठ के भवन का नामकरण एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।
इस अधिवेशन का मुख्‍य विषय होगा ‘‘प्राकृतिक संसाधनों की राजनीति और स्‍वामित्‍व का प्रश्‍न : गांधीवादी हस्‍तक्षेप’’ अधिवेशन के उप-विषय होंगे प्राकृतिक संसाधन : मुद्दे और चुनौतियां, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण’, जल, जंगल और जमीन का संरक्षण’, संसाधन और संघर्ष : बाहर निकलने के गांधीवादी रास्‍ते’, संपत्ति पर नियंत्रण का सवाल : हिंसक बनाम अहिंसक संघर्ष’, सभ्‍यता का संकट और उसका समाधान’, राष्‍ट्र राज्‍य की केंद्रीयता और स्‍वराज का विकेंद्रीकरण’, विकास और न्‍यासिता : वैचारिक विश्‍लेषण तथा सुशासन और धारणीय विकास इन विषयों पर मुक्ति बोध भवन में कस्‍तुरबा, प्रभावती तथा नेल्‍सन मंडेला के नाम पर बने कक्ष में समानांतर सत्रों में चर्चा होगी। इस अधिवेशन का एक सत्र 28 सितंबर को गांधी विचार की प्रेरणास्‍थली सेवाग्राम स्थित शांति भवन, बुनियादी तालीम के परिसर में सम्‍पन्‍न होगा। अधिवेशन में देशभर से आए प्रतिभागी शोध-पत्र प्रस्‍तुत करेंगे।
अधिवेशन के उदघाटन समारोह में अतिथियों के द्वारा स्‍मारिका का प्रकाशन किया जाएगा जिसमें देशभर के गांधी विचारकों के आलेख शामिल हैं। स्‍मारिका में प्रकाशित उत्‍कृष्‍ट  प्रथम तीन आलेखों को सोहन राज लक्ष्‍मी देवी तातेर पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। अधिवेशन के दौरान सांस्‍कृतिक संध्‍या में 28 सितंबर को सुप्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्‍थी का लोकगायन होगा। इस अधिवेशन में उपस्थित रहने की अपील डॉ. नृपेंद्र प्रसाद मोदी ने की है।


राज्‍यों का पुनर्गठन और मीडिया दृष्टि : तेलंगाना और विदर्भ के संदर्भ में विषय पर परिसंवाद में वक्‍ताओं ने रखे विचार

विकास के लिए छोटे राज्‍यों की है जरूरत

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में राज्‍यों का पुनर्गठन और मीडिया दृष्टि : तेलंगाना और विदर्भ के संदर्भ में विषय पर मंगलवार को आयोजित परिसंवाद में एचएमटीवी, द हंस इंडिया डेली, हैदराबाद के प्रधान संपादक के. रामचंद्र मूर्ति, लोकमत, नागपुर के प्रधान संपादक सुरेश द्वादशीवार तथा हिंदुस्‍तान टाइम्‍स और इंडियन एक्‍सप्रेस के पूर्व संपादक सी. के नायडू ने माना कि विकास के लिए छोटे राज्‍यों की आवश्‍यकता है। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कुलपति विभूति नारायण राय ने की।
चर्चा की शुरूआत करते हुए सी. के. नायडू ने कहा कि छोटे राज्‍यों की बात आजादी से पहले यानी 1920 से ही चल रही है। तब भाषायी आधार पर राज्‍य बनाने की बात कहीं गई थी। कुछ राज्‍य बने भी परंतु अलग राज्‍य बनने पर कितना विकास हुआ यह सोचने की बात है। छोटे राज्‍य बनाने का समर्थन डॉ. आंबेडकर, कन्‍हैयालाल मुंशी आदि ने किया था। उन्‍होंने भाषा के साथ-साथ आर्थिक, राजनैतिक आधार को भी देखे जाने की भूमिका ली थी। चर्चा की कडी में प्रो. सुरेश द्वादशीवार ने छोटे राज्‍यों की संकल्‍पना से लेकर वे बनने के बाद की स्थिति का विश्‍लेषण अपने वक्‍तव्‍य में किया। विदर्भ राज्‍य निर्मिति और विकास का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि जेवीपी कमिशन ने विदर्भ की मांग मंजूर की थी। इस कमिशन ने लोगों द्वारा स्‍वतंत्र राज्‍य बनाने की मांग से ही पहले राज्‍य बनाने का संकेत दिया था। 1956 के राजनीतिक परिदृष्‍य का हवाला देते हुए द्वादशीवार ने कहा कि 1956 का आंदोलन शक्तिशाली था। इस आंदोलन के चलते  विदर्भ में 53 विधायक चुनकर आए थे। पंरतु बाद में इस तरह का आंदोलन जारी नहीं रह सका। उन्‍होंने कहा कि पिछले 60 वर्ष में जिस तरह महाराष्‍ट्र का विकास हुआ वैसा विदर्भ का नहीं हो सका। जहां एक तरफ मुंबई में रहनेवालों की वार्षिक आय 94000 हैं वहीं गडचिरोली में रहनेवालों की आय 17000 रूपये से भी कम है। उन्‍होंने विदर्भ में हो रही किसान आत्‍महत्‍याएं और मेलघाट में हो रहे कुपोषण का मुद्दा उठाते हुए इसे राजनीति की असफलता करार दिया। छोटे राज्‍य के समर्थन में उन्‍होंने कहा कि विदर्भ की आबादी 2 करोड है और दुनिया में 100 देश ऐसे है जिनकी आबादी विदर्भ राज्‍य से भी कम है। 100 से अधिक देशों का भौगोलिक क्षेत्र तो विदर्भ से भी कम है। उन्‍होंने माना कि विदर्भ शांति से ही बनेगा, बंदूक से नहीं।
के. रामचंद्र मूर्ति ने कहा कि तेलंगाना की समस्‍या विदर्भ जैसी ही है। उन्‍होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में सब कुछ हैदराबाद में ही केंद्रित हो गया है। इसी लिए वहा सब लोग हैदराबाद को ही चाहते है। सीमांध्रा और तेलगांना के बीच भी हैदराबाद को लेकर खींचतान जारी है। अध्‍यक्षीय उदबोधन में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि विश्‍वविद्यालय में छोटे राज्‍यों के पुनर्गठन के बारे में हुई बहस एक स्‍वस्‍थ बहस रही। उन्‍होंने माना कि जहां हम छोटे राज्‍यों की बात कर उसका समर्थन करते है वहीं छोटे राज्‍यों के खराब उदाहरण भी हमारे सामने मौजूद है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र को चाहिए की वह राज्‍य पूनर्गठन आयोग बनाएं और हर राज्‍य के बारे में केस-टू-केस सोच कर वहां की आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक पहलुओं को ध्‍यान में रखकर राज्‍य बनाने पर विचार करें। चर्चा के दौरान सुनील घोडके, अर्चना त्रिपाठी, प्रेम कुमार तथा भारती देवी आदि छात्र-छात्राओं ने सवाल उपस्थित किए जिसका समाधान मंचासीन वक्‍ताओं ने किया। प्रारंभ में विभिन्‍न विभागों के छात्र-छात्राओं ने विश्‍वविद्यालय का कुलगीत प्रस्‍तु‍त किया। कार्यक्रम का संचालन परिसंवाद के संयोजक तथा संचार एवं मीडिया अध्‍ययन केंद्र के निदेशक प्रो. अनिल कुमार राय ने किया। आभार केंद्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. अख्‍तर आलम ने माना। इस अवसर पर जाने-माने लेखक से. रा. यात्री, नाटयकला एवं फिल्‍म अध्‍ययन विभाग के अध्‍यक्ष प्रो. सुरेश शर्मा, सहायक प्रोफेसर धर्वेश कठेरिया, राजेश लेहकपुरे, संदीप वर्मा, जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे समेत छात्र-छात्राएं बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।