शनिवार, 14 सितंबर 2013

हिंदी विश्‍वविद्यालय में हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ

निबंध, सुलेख और वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ  


सरकारी कामकाज और आम लोगों के बीच राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय ,वर्धा में हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ हो चुका है। सोमवार से शुरु हुए हिंदी पखवाड़े के तहत विश्‍वविद्यालय के रोजाना के कागजी कामकाज में ज्यादा से ज्यादा हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाएगा और हस्ताक्षर करने व दूसरी कागजी कारवाईयों में हिंदी भाषा के प्रयोग करने को लेकर कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। विश्‍वविद्यालय के हिंदी अधिकारी राजेश कुमार यादव ने बताया कि 2 सिंतबर से 16 सितंबर तक चलने वाले हिंदी पखवाडे का प्रारम्भ सुलेख प्रतियोगिता के साथ हुआ। 2 सिंतबर को विश्‍वविद्यालय के एमटीएस कर्मचारियों के लिए सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कर्मचारियों ने काफी उत्‍साह से प्रतिभागिता की। विश्‍वविद्यालय के अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के सभागार में आयोजित इस प्रतियोगता में निर्णायक के रूप में मनोज द्विवेदी , शंभु दत्‍त सती और के. के. त्रिपाठी उपस्थित थे। 4 सितंबर को वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ बीरपाल यादव, राकेश मिश्र और संदीप सपकाले थे। विद्वान निर्णायकों का जोर था की कि हमें निश्चित ही अंग्रेजी और अन्य भाषाएं सीखनी चाहिए परंतु यह भी ध्यान रखना होगा कि इससे राष्ट्रभाषा को नुकसान न हो। 6 सितंबर को आयोजित हिंदी निबंध प्रतियोगिता मेंहिंदी की उन्‍नति से देश की उन्‍नतिशीर्षक दिया गया और प्रतिभागियों ने बड़े ही मनमोहक निबंध लिखे I इस अवसर पर विश्‍वविद्यालय की पत्रिका बहुवचन के संपादक श्री अशोक मिश्र ने कहा कि मातृ भाषा हमारी सांसों में बसती है। हम अपने सपने भी हिंदी भाषा में ही देखते हैं। प्रेम की भाषा हिंदी है। हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। डॉ एम.एम मंगोडी ने इस अवसर पर कहा कि हिंदी भाषा गैर हिंदी भाषियों के हाथों में अधिक सुरक्षित है। उन्होंने गांधी जी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा सुराज हिंदी के रास्ते ही आ सकता है। डॉ अनवर अहमद सिद्दकी ने कहा कि हिंदी की उन्‍नति के द्वारा देश की भी उन्‍नति होगी। उन्‍होंने कहा कि हिंदी को अपने जीवन में उतारे। पखवाड़े का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह 16 सितंबर को विश्‍वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय की अध्‍यक्षता में संपन्न होगा । पखवाड़े के दौरान हिंदी टंकण और काव्य पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। 

बुधवार, 11 सितंबर 2013

सदस्‍यों को ऋणग्रस्‍त नहीं ऋणमुक्‍त करना ही सहकारिता का लक्ष्‍य


महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय कर्मचारियों की साख संस्‍था के संचालक मंडल के सदस्‍यों के लिए हाल ही में एक त्रिदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्‍न हुआ। विश्‍वविद्यालय की पहली इमारत प्रथमा में साख संस्‍था के कार्यालय का उद्घाटन कुलपति विभूति नारायण राय ने किया। उन्‍होंने प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित सहकारी संस्‍था, वर्धा के सहायक निबंधक श्री जयंत तलमले और सहायक अधिकारी श्री डी. एच रोहणकर का स्‍वागत करते हुए कहा कि सहकारिता आंदोलन को गति देने हेतु इस प्रकार के प्रशिक्षण महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। महाराष्‍ट्र राज्‍य सहकारी संघ, पुणे तथा सहायक निबंधक कार्यालय सहकार संस्‍था,  वर्धा की ओर से प्रशिक्षक के रूप में सह प्रशिक्षण केंद्र नागपुर के सेवानिवृत्‍त प्राचार्य एस. जे जगनाडे तथा मोहन चिचपाणे ने मार्गदर्शन किया। उन्‍होंने सहकारिता आंदोलन के इतिहास उसकी उपयोगिता और चुनौतियों के साथ ही इस बात पर भी प्रकाश डाला कि संचालकों और सदस्‍यों के अधिकार तथा कर्तव्‍य क्‍या हैं। अपने सदस्‍यों के आर्थिक हितों के संरक्षण तथा अभिवृद्धि हेतु संचालक मंडल को किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए। सदस्‍यों को ऋणग्रस्‍त नहीं ऋणमुक्‍त करना ही लक्ष्‍य होना चाहिए। कुलसचिव डॉ. कैलाश खामरे ने इस दिशा में सहकारी संस्‍था,  वर्धा एवं डॉ. अनिल कुमार दुबे के नेतृत्‍व में उनके संचालक मंडल के सदस्‍यों द्वारा की गई कार्रवाई की प्रशंसा की। वित्‍ताधिकारी श्री संजय बी. गवई ने संस्‍था की उन्‍नति में हर प्रकार के सहयोग का आश्‍वासन दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन श्री विजय पवार सहण शिक्षणाधिकारी वर्धा ने तथा आभार प्रदर्शन साख संस्‍था के सचिव श्री राजेश अरोड़ा ने किया। इस अवसर पर संचालक मंडल के सदस्‍य डॉ. एम.एम. मंगोड़ी, डॉ.रामानुज अस्‍थाना, डॉ. बीर पाल सिंह यादव,  हेमलता गोडबोले,  संगीता मालवीया,  ज्‍योतिष पायेड,  के. के.त्रिपाठी, गिरीश चंद्र पाण्‍डेय,  पवन कुमार, अमित पांडे, विजयपाल पांडेय के अलावा डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी,  विनोद वैद्य,  संजय तिवारी,  सचिन हाडके सहित बड़ी संख्‍या में शिक्षक एवं शिक्षकेतर अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

आपने पर कतर दिए मेरे, अब मेरी कैद क्‍या रिहाई क्या

इलाहाबाद क्षेत्रीय केंद्र में जुटे ख्‍यातनाम कवि

सांझा संस्‍कृति के शहर इलाहाबाद में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र इलाहाबाद के सत्‍य प्रकाश मिश्र सभागार में जब शहर के तमाम ख्‍यातनाम कवि और शायर काव्‍य पाठ के लिए जुटे तो शाम कवितामय हो गई। भीष्‍म साहनी और फिराक गोरखपुरी की स्‍मृति को समर्पित काव्‍य संध्‍या में सभी कवि और शायरों ने अपनी सर्वोत्‍तम कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम की शुरूआत भीष्‍म साहनी की प्रगतिशील चेतना और फिराक गोरखपुरी के सांझा संस्‍कृति के पैरोकार होने को रेखांकित करने से हुई। उनकी स्‍मृति को और जाग्रत करने के लिए प्रो. अली अहमद फातमी ने उनकी एक नज्‍म पढ़ी। युवा शायर और गुफ्तगू पत्रिका के संपादक इम्तियाज़ गाजी ने अपनी रचनाएं प्रस्‍तुत करते हुए सबका ध्‍यान आकृष्‍ट किया। उनकी पंक्तियां थी – जिसका दुश्‍मन नहीं कोई, उससे बच के रहा कीजिए। युवा कवियित्री संध्‍या नवोदिता ने अपनी दो विचारोत्‍तेजक कविताएं प्रस्‍तुत की। अपनी देश देश कविता में देश को संबोधित करते हुए उस पर आसन्‍न संकटों को मार्मिक ढ़ंग से प्रकट किया, उनकी दूसरी कविता देश के मुखिया की चुप्‍पी पर केंद्रित थी। युवा कवि अंशुल त्रिपाठी ने क्‍या कहूं उनसे’, यास्‍मीन’, पिघलती हुई दुनिया’, एक अदीब के घर शीर्षक कविताएं पढ़कर खूब प्रशंसा पाई। अनहद पत्रिका के संपादक युवा कवि संतोष चतुर्वेदी ने हमारी धरती’, जिंदगी’, अनोखा रंग है पानी का प्रस्‍तुत की। जिसमें उनकी पढ़ी गई कविता जो पानी पर केंद्रित थी खूब सराहा गया। वरिष्‍ठ नवगीतकार यश मालवीय ने अपनी रचनाओं से सबका ध्‍यान आकृष्‍ट किया। उन्‍होंने इन दिनों शीर्षक से रचना पढ़ी। उनकी पक्तियां थी- बॉंधता है घड़ी लेकिन बीमार है, यह हमारे दौर का फनकार है। वरिष्‍ठ कवि नंदल हितैषी ने सही जगह’, धार शीर्षक कविताएं पढ़ कर समाज पर करारा तंज कसा। उनकी रचनाओं में मारक व्‍यंग्य ध्‍वनियां थी। प्रसिद्ध गज़लकार एहतराम इसलाम ने खूब वाहवाही बटोरी उन्‍होंने अन्‍त में एक शेर पढ़ा आपने पर कतर दिए मेरे, अब मेरी कैद क्‍या, रिहाई क्‍या जिसे बार-बार श्रोताओं ने सुनना चाहा। पेशे से वकील और बुजुर्ग शायर एम.ए. कदीर ने भगदड़ नाम से नज़्म प्रस्‍तुत की। उन्‍होंने कहा- हालांकि आधियों ने मचाई उथल-पुथल, चीजें पहुंच गई अपने मकाम पर। वरिष्‍ठ शायर सुरेश कुमार शेष ने अपनी प्रस्‍तुति की शुरूआत में एक शेर कहा अब तो कदम-कदम पर यहां राम भक्‍त हैं, अब कोई देश भक्‍त रहे तो कहां रहे। जिसे श्रोताओं ने जमकर सराहा। गोष्‍ठी के अन्‍त में वरिष्‍ठ नाटककार एवं कवि अजित पुष्‍कल ने अपनी कविता पढ़ी जिसकी पक्तियां थी- कवि जब चुप रहता है सुलगता है सौरमंडल की आंच में तपता है शब्‍द।
गोष्‍ठी की अध्‍यक्षता उर्दू के ख्‍यातनाम आलोचक ए.ए. फातमी ने की। उन्‍होंने अपने अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में कहा कि गोष्‍ठी में पढ़ी गई सभी रचनाएं उम्‍दा थी, जो आज के हालात पर सोचने के लिए मजबूर करती हैं, प्रेरणा देती हैं। इस तरह के आयोजनों से हम अपने शहर की सांझा संस्‍कृति और शायर,कवि, अदीबों की रचनाओं से रूबरू होते हैं। आयोजन के लिए उन्‍होंने हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति श्री विभूति नारायण राय और केंद्र के प्रभारी प्रो. संतोष भदौरिया का शुक्रिया अदा किया। गोष्‍ठी की शुरूआत में सभी कवि शायर, अदीबों का परिचय प्रो. संतोष भदौरिया ने दिया। स्‍वागत सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. यशराज सिंह पाल और असरार गांधी ने किया।

काव्‍य पाठ के दौरान प्रमुख्‍य रूप से सुरेन्‍द्र राही, नीलम शंकर, अविनाश मिश्र, अनिल रंजन भौमिक, वीनस केसरी, शाहनवाज़ आलम, सम्‍पन्‍न श्रीवास्‍तव, सौरभ पाण्‍डेय, विपिन श्रीवास्‍तव, सत्‍येन्‍द्र सिंह, अमरेन्‍द्र, रोहित सिंह सहित शहर के तमाम काव्‍य प्रेमी उपस्थित थे।

सोमवार, 9 सितंबर 2013

भाषा एक हथियार हैः केदारनाथ सिंह

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को आटोग्राफ देते केदारनाथ सिंह
हिंदी के विशिष्ट कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि हमारे पास भाषा एक हथियार है जिसका सही इस्तेमाल करना चाहिए। डा. सिंह आज महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कोलकाता केंद्र में पत्रकारिता और साहित्य पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने ही हिंदी गद्य का निर्माण किया। एक समय था जब हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में गहरा संबंध था। लेकिन आजादी के बाद उसमें विलगाव पैदा हो गया। उन्होंने कहा कि आज हिंदी पत्रकारिता में भाषा और वर्तनी को लेकर अराजकता है। इससे आज के पत्रकारों को पार पाना होगा।

प्रो. सिंह ने कहा कि भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता अंग्रेजी पत्रकारिता से कहीं से कमतर नहीं है। उन्होंने निखिल चक्रवर्ती का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि निखिल दा अंग्रेजी का पत्रकार होने के बावजूद अपने को अद्यतन रखने के लिए आनंद बाजार पढ़ते थे। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के विकास में स्वाधीनता आंदोलन का बहुत बड़ा योगदान है। संगोष्ठी में फातिमा कनीज, सोनी कुमारी सिंह, उपेंद्र शाह, अम्बरीन अरशद, करुणा गुप्ता, जया तिवारी, विनय कुमार प्रसाद, अभिषेक कुमार शर्मा और अमित कुमार राय ने भी भाग लिया। इस अवसर पर प्रो. सिंह ने श्रेष्ठ आशु अनुवाद के लिए वेब पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा की छात्रा अम्बरीन अरशद को सम्मानित किया। आखिर में कोलकाता केंद्र के प्रभारी डा. कृपाशंकर चौबे ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

हिंदी विश्‍वविद्यालय में तीन दिवसीय मानवविज्ञान प्रदर्शनी का उदघाटन

क्षेत्रीय मानवविज्ञान संग्रहालय, मध्‍य क्षेत्रीय केंद्र, भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, नागपुर एवं महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के मानवविज्ञान विभाग के संयुक्‍त तत्‍वावधान में मानव उदभव, उदविकास एवं जैव सांस्‍कृतिक विविधता प्रदर्शनी का उदघाटन गुरुवार दि. 05 सितंबर को विश्‍वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. ए. अरविंदाक्षन द्वारा किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. के. जी. खामरे, उपकुलसचिव पी. एस. सिंह, भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, मध्‍य क्षेत्रीय केंद्र, नागपुर के के. रवि, प्रो. अनिल कुमार राय, रामानुज अस्‍थाना, अशोक नाथ त्रिपाठी, प्रदीप दाते, मानवविज्ञान विभाग के अध्‍यक्ष डॉ. फरहद मलिक, डॉ. एस. गंगोपाध्‍याय, प्रो. बी. एम. मुखर्जी, डॉ. मनोज राय, के. के. त्रिपाठी, अशोक मिश्रा, राजीव रंजन राय, सहायक प्रोफेसर निशीथ राय, राजेश यादव, संग्रहालय के प्रभारी वीरेन्‍द्र यादव, बी. एस. मिरगे, अमित विश्‍वास, जे. बी. साइंस महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओम महोदय, सहायक प्रोफेसर एस. वी. बावनकर, हिरल पाडिया, एस. वी. थावरी, ए. डी. थेंग, प्रगति देशमुख, वनिता निमजे आदि सहित छात्र-छात्राएं बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।  
 
यह प्रदर्शनी 7 सितंबर तक चलेगी। प्रदर्शनी में मुख्‍यत: लाखों वर्षों का मानव अस्तित्‍व, उदविकास, विभिन्‍नताएँ, मानव देशांतरण, मानव जीनोम, नर्मदा घाटी एवं शिवालिक क्षेत्र में पाए गए अस्थि अवशेष एवं विभिन्‍न प्रकार के पाषाण उपकरण, औजारों आदि को दर्शाया गया है। साथ ही प्रदर्शनी में मध्‍य भारत में निवास करने वाली प्रमुख जनजातियाँ जैसे बैगा, भारिया, मुरिया, माडि़या, कोलाम आदि के उदभव, उदविकास, अनुकूलन एवं जैव सांस्‍कृतिक विविधताओं के साथ उनके पशुपालन, मछली मारना एवं शिल्‍पकला इत्‍यादि को प्रमुख रूप से दर्शाया गया है।  प्रदर्शनी में जनजातियों पर बने वृतचित्र एवं लोक गीतों एवं नृत्‍यों के चलचित्रों को भी प्रस्‍तुत किया गया। यह प्रदर्शनी सभी के लिए नि:शुल्‍क है।  आयोजकों ने आहवान किया है कि प्रदर्शनी को देखने, जानकारी लेने अधिक से अधिक संख्‍या में स्‍थानीय निवासी, स्‍कूल एवं कालेज के छात्र-छात्राएँ अवश्‍य पहुँचे और मानव उत्‍पत्ति, उदविकास एवं जैव सांस्‍कृतिक विविधता की जानकारी से लाभान्वित हों। प्रदर्शनी का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। 

हिंदी विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापकों को शिक्षक दिवस पर लॉयन्‍स क्‍लब ने किया सम्‍मानित

शिक्षक दिवस के अवसर पर महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय तथा लॉयन्‍स क्‍लब व लॉयनेस क्‍लब, वर्धा के संयुक्‍त तत्‍वावधान में हबीब तनवीर सभागार में आयोजित शिक्षक सम्‍मान समारोह में विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापकों को सम्‍मानित किया गया। समारोह की अध्‍यक्षता लॉ. एम. जे. एफ. ज्ञानेश्‍वर वांदिले ने की। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में विश्‍वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. ए. अरविंदाक्षन तथा कुलसचिव डॉ. कैलाश खामरे, लॉयन्‍स क्‍लब की अध्‍यक्ष रंजना दाते, लॉयनेस पुष्‍पा मोहोड, डॉ. विनोद अदलखिया, अभिजीत श्रावणे मंचासीन थे। समारोह में  विश्‍वविद्यालय के साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. सूरज पालीवाल, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. देवराज, मानविकी एवं समाजविज्ञान विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. अनिल कुमार राय, सृजन विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. सुरेश शर्मा तथा भाषा विद्यापीठ के प्रभारी अधिष्‍ठाता डॉ. विजय कौल को स्‍मृतिचिन्‍ह, शॉल एवं श्रीफल प्रदान कर सम्‍मानित किया गया।

समारोह का प्रारंभ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्‍ज्‍वलन से किया गया। इस अवसर पर उदबोधन देते हुए प्रतिकुलपति प्रो. ए. अरविंदाक्षन ने कहा कि समाज को बनाने की दिशा में संयुक्‍त भागीदारी के प्रयास से इस प्रकार का आयोजन विश्‍वविद्यालय परिवार के लिए महत्‍वपूर्ण है। सामाजिक भागीदारी से शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सम्‍मानीत किए जाने से हम सुधार की दिशा में और आगे बढ़ सकेंगे। अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में लॉयन्स के 323 एच 1 के प्रांतपाल एम.जे. एफ. ज्ञानेश्‍वर वांदिले ने शिक्षक और छात्रों के बीच के संबंधों को और पुख्‍ता बनाने के लिए यह हमें कार्य करना होगा। लॉयन्‍स क्‍लब इस शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में अपनी अहम भागीदारी करते हुए इस प्रकार के आयोजन विश्‍वविद्यालय में भविष्‍य में भी करेगा। कुलसचिव डॉ. कैलाश खामरे ने कहा कि विश्‍वविद्यालय के स्‍तर पर भी शिक्षा दिवस के अवसर पर शिक्षकों को सम्‍मानित करने की परंपरा महाराष्‍ट्र के अनेक विश्‍वविद्यालयों में है। यह परंपरा इस विश्‍वविद्यालय में शुरू करने की मंशा थी वह आज विश्‍वविद्यालय और लॉयन्‍स क्‍लब के इस संयुक्‍त आयोजन से पूरी हुई है। लॉयन्‍स की अध्‍यक्ष रंजना दाते ने कहा कि यह विश्‍वविद्यालय वर्धा शहर का सम्‍मान है और इसमें कार्यरत शिक्षकों का सम्‍मान करते हुए हम सम्‍मानित हो रहे हैं। विद्या के क्षेत्र में इस विश्‍वविद्यालय का महत्‍वपूर्ण योगदान हम सभी के लिए प्रेरणा बनेगा। प्रो. देवराज ने अपनी भावनाएं प्रकट करते हुए कहा कि विश्‍वविद्यालय महाराष्‍ट्र में स्‍थापित होने की वजह से हमें चाहिए कि यहां के जीवन, मिट्टी, भाषा, संस्‍कार और संस्‍कृति से जुड़े रहे। उन्‍होंने कहा कि अच्‍छाई के लिए तो पीठ जरूर थपथपाइए, परंतु गलती होने पर टोकना भी चाहिए। इस दौरान सम्‍मानित अधिष्‍ठाता प्रो. सुरेश शर्मा, प्रो. अनिल कुमार राय, प्रो. सूरज पालीवाल तथा विजय कौल ने भी अपनी भावनाएं प्रकट की और सम्‍मान के प्रति आभार जताया। समारोह का संचालन स्‍मीता बढिये व ऋतुराज चुडिवाले ने किया तथा धन्‍यवाद ज्ञापन जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे ने किया। समारोह में विश्‍वविद्यालय की डॉ. अन्‍नपूर्ण चर्ले, डॉ. अनिल कुमार पाण्‍डेय, डॉ. अनवर अहमद सिद्दीकी, डॉ. रामानुज अस्‍थाना, डॉ. ए. एन. त्रिपाठी, डॉ. हरीश हुनगुंद, डॉ. सतीश पावडे, डॉ. रयाज हसन, सहायक प्रोफेसर अख्‍तर आलम, रेणु सिंह, राजेश लेहकपुरे, संदीप वर्मा, समारोह के संयोजक प्रदीप दाते, लॉयन चंद्रशेखर इंगोले, गिरीश उपाध्‍याय, प्रदीप पसिने, प्रतिभा वालके, विश्‍वास भांबुरकर, बोरकर, नौशाद बक्‍श, बाबा मोहोड, हेमलता इंगोले, अंकुश कत्रोजवार सहित विश्‍वविद्यालय के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे। 

सोमवार, 2 सितंबर 2013

धर्मनिरपेक्षता ने ही भारत की एकता अक्षुण्ण रखीः विभूतिनारायण राय

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति तथा हिंदी के जाने-माने उपन्यासकार विभूतिनारायण राय ने कहा है कि धर्मनिरपेक्षता ने ही भारत की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखा है। श्री राय आज प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में गांधी स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। उनके व्याख्यान का विषय था-'राज्य और सांप्रदायिकता'। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान धर्मनिरपेक्ष देश नहीं था इसीलिए वह टूट गया। जिन्ना ने जब जबरन उर्दू थोपनी चाही तो बांग्लाभाषियों ने उसका प्रतिरोध कर आंदोलन किया जिसकी परिणति बांग्लादेश नामक स्वतंत्र देश के जन्म के रूप में हुई।
श्री राय ने कहा कि यदि भारत में हिंदी और देश के बीच किसी एक के चयन का प्रश्न हो तो वे हिंदी विश्वविद्यालय का कुलपति होने और हिंदी का लेखक होने के बावजूद देश का चयन करेंगे। उन्होंने वैसे यह भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता को भारत के सर्वोच्च नेतृत्व ने तो स्वीकार किया किंतु तृणमूल स्तर के लोगों ने नहीं किया। श्री राय ने कहा कि राज्य के पोषण व प्रोत्साहन के बगैर सांप्रदायिकता नहीं फल-फूल सकती। उन्होंने कहा कि वे खुद जब भारतीय पुलिस सेवा में थे तो उन्होंने देखा कि राज्य की एक एजेंसी पुलिस की सांप्रदायिकता फैलाने में बड़ी भूमिका रही है। चूंकि पुलिस में भर्ती होनेवाले अधिकतर लोग बहुसंख्यक समुदाय से आते हैं और उनके भीतर बचपन से ही मुस्लिमों के खिलाफ विद्वेष भरा जाता है इसीलिए वे अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदनशील नहीं रह पाते। उन्होंने भारत में अब तक हुए दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि हर जगह दंगे के शिकार अल्पसंख्यक ही रहे हैं। श्री राय ने हाशिमपुरा के अपने अनुभव को भी बांटा। उन्होंने प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। कार्यक्रम का संचालन डा. वेदरमण व धन्यवाद ज्ञापन डा. तनुजा मजुमदार ने किया। अध्यक्षता प्रेसीडेंसी के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डा. अनीक चटर्जी ने की। श्री राय ने प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय की कुलपति डा. मालविका सरकार के साथ बैठक भी की। इस बैठक में हिंदी विश्वविद्यालय के कोलकाता केंद्र के प्रभारी डा. कृपाशंकर चौबे भी उपस्थित थे। प्रेसीडेंसी व हिंदी विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से कतिपय परियोजनाएं चलाने का भी सिद्धांततः फैसला किया।