शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

श्री विभूति नारायण राय को हिमालय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सृजन सम्मान

                        हिमालय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव 2013

हिमालय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के तीसरे दिन आज सिक्किम गवरमेंट कॉलेज के प्रेक्षागृह में सिक्किम पर्यटन मंत्री श्री भीम प्रसाद धुंगेल ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का उदघाटन किया। इस अवसर पर सिक्किम विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो॰ टी॰ डी॰ सुब्बा, सिक्किम कॉलेज के प्राचार्य डॉ॰ एम॰ पी॰ खरेल तथा पद्मश्री सोनम छिरिंग लेप्चा आदि उपस्थित थे।
माननीय मंत्री श्री भीम प्रसाद धुंगेल ने हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रख्यात साहित्यकार तथा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति  श्री विभूति नाराय राय को हिमालय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सृजन सम्मान प्रदान किया। जबकि नेपाली साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए माननीय कुलपति प्रो॰ टी॰ डी॰ सुब्बा ने श्री शंकर देव ढकाल को हिमालय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया।
उदघाटन वक्तव्य में माननीय पर्यटन मंत्री ने कहा वर्तमान समय में हिमालय के पर्यावरण तथा संस्कृति को बचाना भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व समाज के लिए चुनौती है। हिमालय केवल एक पर्वत नहीं संस्कृति का संवाहक है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति नेपाल के गंधर्व द्वारा गायने गीत से हुई तत्पश्चात तिब्बत के ग्रुप तेंजिंग दोनियो ने तिब्बत का पारंपरिक गीत, सिक्किम के लिम्बू ग्रुप, नटराज कला केंद्र द्वारा कत्थक नृत्य, सायरी द्वारा लेपचा पारंपरिक नृत्य, भुटान के पारो द्वारा भुटिया डांस, गंगा मुखिया द्वारा नेपाली लोकगीत, सिक्किम विश्वविद्यालया के छात्रों तथा नटराज कला केंद्र द्वारा नेपाली पारंपरिक नृत्य, सिक्किम के सोम्ब्रे ग्रुप द्वारा चेबरुंग नृत्य, सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्र पार्थो द्वारा बांसुरी वादन, सिक्किम गवरमेंट कॉलेज द्वारा नेपाली लोकगीत जैसे एक के बाद एक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के मध्य श्री विभूति नाराय राय तथा श्री शंकर देव ढकाल को हिमालय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया। विभूति नारायण राय जी ने सम्मान के लिए संस्था का आभार व्यक्त किया साथ ही सिक्किम की सांस्कृतिक परंपरा को विशिष्ट बताया। श्री शंकर देव ढकाल जी ने सम्मान के लिए संस्था का आभार व्यक्त किया। उन्होने कहा हिमालय की पहचान उसकी अपनी अद्भुत सांस्कृतिक परंपरा से है जिसे बचाए जाने के संस्था द्वारा किए जाने वाले पर्यासों की उन्होने सराहना की।
      हिमालय के पारंपरिक परिधानों को लेकर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें हिमालय के विभिन्न समुदायों के पारंपरिक परिधानों को प्रस्तुत किया गया। इन परिधानों के माध्यम से हिमालय की परंपरागत संस्कृति को दर्शकों से रूबरू कराना इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य है।           
      अतिथियों का स्वागत एच॰एच॰आर॰डी॰एस॰ (हिमालय हेरिटेज, रिसर्च डेवलोपमेंट सोसाइटी) के अध्यक्ष  तथा महोत्सव के परिकल्पक ( डॉ॰ ओमप्रकाश भारती) ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष जयंत कुमार बर्मन ने किया। कार्यक्रम की उद्घोषणा पारसमणी दंगाल ने की तथा संचालन डॉ॰ महेन्द्र कुमार, समीर मित्र, कैलाश जीवानी, कुमार गौरव मिश्रा, धर्मप्रकाश मंटो, भोला दयाल, रवीन्द्र कुमार मुंढे, अभिषेक त्रिपाठी, सुषमा पाण्डेय, डॉ॰ अनुजा सुप्रिया, शताब्दी बर्मन आदि ने किया।

      दिनांक 9 अगस्त को सिक्किम विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में “हिमालय की सांस्कृतिक परंपरा तथा देशज ज्ञान” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई है। संगोष्ठी में भुटान, नेपाल, तिब्बत, उत्तर बंगाल, सिक्किम, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि के ख्यातिलब्ध विद्वान तथा शोधार्थीयों ने अपने पत्र प्रस्तुत किए।              

2 टिप्‍पणियां:

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